आरक्षण क्यों ज़रूरी है? भारत में आरक्षण की उत्पत्ति और दुनिया का नज़रिया
भारत में “आरक्षण” एक ऐसा शब्द है, जिस पर बहस तो बहुत होती है, लेकिन समझ बहुत कम है। अक्सर इसे “मुफ़्त की सुविधा” या “योग्यता के ख़िलाफ़” बताकर खारिज कर दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आरक्षण की ज़रूरत ही नहीं थी, तो इसे बनाया क्यों गया?क्या कोई भी देश यूँ ही दशकों तक एक नीति को ढोता रहेगा? असल में आरक्षण कोई दया या एहसान नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अन्याय का संवैधानिक उपचार है।
आरक्षण क्यों ज़रूरी है?
1. सदियों का सामाजिक भेदभाव
भारत का जाति-आधारित समाज हजारों वर्षों तक कुछ वर्गों को:
शिक्षा से दूर रखता रहा मंदिरों, कुओं, ज़मीन और सत्ता से वंचित रखता रहा उन्हें “अस्पृश्य” तक कहा गया जब एक समाज में पीढ़ियों तक अवसर ही नहीं मिले हों, तो केवल यह कह देना कि “अब सब बराबर हैं” — एक छलावा बन जाता है। आरक्षण उसी छलावे को तोड़ने की कोशिश है।
2. बराबरी का मैदान पहले चाहिए
अक्सर कहा जाता है :– “सबको बराबर अवसर मिलना चाहिए, आरक्षण क्यों? ”लेकिन सच्चाई यह है कि: कोई पीढ़ियों से पढ़ा-लिखा है, कोई पीढ़ियों से मजदूरी करता आया है, दोनों को एक ही लाइन में खड़ा कर देना बराबरी नहीं, अन्याय है। आरक्षण का उद्देश्य बराबरी का मैदान (Level Playing Field) तैयार करना है।
3. प्रतिनिधित्व का सवाल
अगर कोई समाज:- संसद, न्यायपालिका, प्रशासन और विश्वविद्यालय हर जगह एक ही वर्ग से भरा हो, तो वह लोकतंत्र नहीं बल्कि एक तरफ़ा सत्ता कहलाएगी।
आरक्षण यह सुनिश्चित करता है कि सत्ता में सभी समाजों की भागीदारी हो।
भारत में आरक्षण की उत्पत्ति कैसे हुई?
1. ब्रिटिश काल से शुरुआत
आरक्षण की जड़ें आज़ादी से पहले की हैं।1902: कोल्हापुर के शाहू महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू किया मद्रास प्रेसीडेंसी में गैर-ब्राह्मण आंदोलन ने सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी माँगी यानी आरक्षण कोई “आज का राजनीतिक हथियार” नहीं, बल्कि सामाजिक संघर्ष की उपज है।
2. डॉ. भीमराव आंबेडकर की भूमिका
डॉ. आंबेडकर ने साफ कहा था:- “राजनीतिक लोकतंत्र तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक सामाजिक लोकतंत्र न हो। ”संविधान निर्माण के समय उन्होंने: SC/ST के लिए आरक्षण शिक्षा और नौकरियों में विशेष प्रावधान भेदभाव निषेध कानून को मजबूती से शामिल कराया। यह आरक्षण भीख नहीं, संवैधानिक अधिकार बना।
3. मंडल आयोग और OBC आरक्षण
1979: मंडल आयोग का गठन, 1990: OBC को 27% आरक्षण लागू इसका उद्देश्य था उन जातियों को अवसर देना जो संख्या में बड़ी थीं लेकिन सत्ता से दूर थींयह कदम विवादास्पद जरूर था, लेकिन समाज की वास्तविक तस्वीर सामने लाने वाला भी था।
क्या आरक्षण योग्यता के खिलाफ है?
यह सबसे बड़ा भ्रम है। सच्चाई क्या है? आरक्षण अयोग्य को योग्य नहीं बनाता बल्कि योग्य लेकिन वंचित को अवसर देता हैआज: SC/ST/OBC से आए IAS, डॉक्टर, वैज्ञानिक देश और दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं अगर आरक्षण से योग्यता खत्म होती, तो यह संभव ही नहीं होता।
अन्य देशों में आरक्षण को कैसे देखते हैं?
1. अमेरिका – Affirmative Action
अमेरिका में:अश्वेत (Black Americans) लैटिनो महिलाओं के लिए शिक्षा और नौकरियों में Affirmative Action लागू हुआ। उद्देश्य:गुलामी और नस्लभेद की भरपाई प्रतिनिधित्व बढ़ाना हालाँकि वहाँ भी इस पर बहस होती रहती है।
2. दक्षिण अफ्रीका
Apartheid (नस्लभेदी शासन) के बाद: Black Economic Empowerment शिक्षा और नौकरियों में प्राथमिकता ताकि सदियों के नस्लीय अन्याय को सुधारा जा सके।
आरक्षण की आलोचना और ज़रूरी सुधार
फर्जी प्रमाण-पत्र क्रीमी लेयर की समस्या राजनीतिक दुरुपयोग जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं।
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PANKAJ BABRA (Legal Name: PANKAJ KUMAR) is the Founder and Chief Editor of "RAJPATH Dastak" Foundation. He is an independent Digital News, Media Website and content writer focusing on social justice, constitutional values, public policy, and ground-level issues in India. Through "RAJPATH Dastak", he aims to amplify marginalized voices and present fact-based, people-centric content writing and journalism.
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