उन्नाव रेप मामला: न्याय की लंबी लड़ाई और समाज की चुनौतियां
भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की चर्चा में उन्नाव रेप मामला एक ऐसा अध्याय है जो न केवल न्याय व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है, बल्कि राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग और पीड़ितों की असहायता को भी सामने लाता है। 2017 में शुरू हुआ यह मामला आज भी सुर्खियों में है, जहां एक नाबालिग लड़की की जिंदगी राजनीतिक साजिशों, हिंसा और कानूनी जटिलताओं की भेंट चढ़ गई।
मामले की शुरुआत: एक नाबालिग की दर्दनाक कहानी
उन्नाव रेप मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से जुड़ा है, जहां 4 जून 2017 को एक 17 वर्षीय लड़की का कथित तौर पर गैंग रेप हुआ। मुख्य आरोपी थे तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उनके भाई अतुल सिंह सेंगर और कुछ अन्य लोग। पीड़िता का आरोप था कि सेंगर ने उसे नौकरी का लालच देकर अपने घर बुलाया और वहां उसके साथ बलात्कार किया गया। यह घटना उस समय की है जब सेंगर राजनीतिक रूप से काफी प्रभावशाली थे, और यही शक्ति उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने में बाधा बनी।
पीड़िता ने कई बार पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं हुई। अप्रैल 2018 में, जब पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की, तब जाकर मामला दर्ज हुआ। लेकिन इससे पहले, अप्रैल 2018 में ही पीड़िता के पिता को सेंगर के भाई और समर्थकों ने बुरी तरह पीटा, और पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई। यह घटना न्याय व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान थी, क्योंकि यह स्पष्ट था कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने आरोपी पक्ष का साथ दिया।
About the Author
RAJPATH Dastak
Administrator
PANKAJ BABRA (Legal Name: PANKAJ KUMAR) is the Founder and Chief Editor of "RAJPATH Dastak" Foundation. He is an independent Digital News, Media Website and content writer focusing on social justice, constitutional values, public policy, and ground-level issues in India. Through "RAJPATH Dastak", he aims to amplify marginalized voices and present fact-based, people-centric content writing and journalism.