गुरु रविदास जी के विचार और सिद्धांत: समानता, मानवता और न्याय का दर्शन?
भारत की संत परंपरा में गुरु रविदास जी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे केवल एक संत नहीं थे, बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत भी थे, जिन्होंने जाति, भेदभाव और पाखंड के विरुद्ध खुलकर आवाज़ उठाई। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उस समय थे जब समाज गहरी असमानता और छुआछूत में जकड़ा हुआ था।
गुरु रविदास जी का जन्म 15वीं शताब्दी में वाराणसी के पास हुआ। वे उस समय के समाज में तथाकथित “निम्न जाति” में जन्मे थे, लेकिन अपने ज्ञान, भक्ति और विचारों से उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि मनुष्य की पहचान जन्म से नहीं, कर्म और चरित्र से होती है।
वे भक्ति आंदोलन के महान संत थे और उनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल है, जो उनकी सार्वभौमिक सोच का प्रमाण है।
“मन चंगा तो कठौती में गंगा”
“मन चंगा तो कठौती में गंगा” यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि गुरु रविदास जी का गहरा जीवन दर्शन है। इस एक पंक्ति में उन्होंने पूरे दिखावटी धर्म, पाखंड और जातिवादी सोच को आईना दिखा दिया। इसका सीधा अर्थ है—अगर मन शुद्ध है, सोच साफ है और कर्म ईमानदार हैं, तो इंसान जहाँ है वहीं गंगा है, वहीं तीर्थ है।
गुरु रविदास जी के समय समाज जाति, छुआछूत और ऊँच-नीच में बंटा हुआ था। लोग मंदिरों, तीर्थों और गंगा स्नान को ही धर्म समझते थे, जबकि इंसानियत और करुणा को भूल चुके थे। गुरु रविदास जी ने साफ कहा कि धर्म बाहरी कर्मकांड नहीं, बल्कि भीतर की सच्चाई है। अगर मन में घृणा, अहंकार और भेदभाव है, तो हजारों तीर्थ भी मनुष्य को पवित्र नहीं बना सकते।
यह विचार आज के समय में और भी ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। आज भी लोग धार्मिक दिखावा तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में नफरत और भेदभाव रखते हैं। “मन चंगा” होने का मतलब है—सच बोलना, अन्याय के खिलाफ खड़ा होना, कमजोर की मदद करना और हर इंसान को बराबरी की नजर से देखना। गुरु रविदास जी का यह संदेश हमें सिखाता है कि ईश्वर मंदिर या नदी में नहीं, बल्कि इंसान के अच्छे आचरण में बसता है। जब सोच साफ होती है, तभी समाज साफ होता है। यही सच्चा धर्म है, यही असली गंगा है।
पूर्व मुख्यमंत्री बहन मायावती जी ने गुरु रविदास जी के जन्मदिन पर क्या कहा?
देश में ’सामाजिक परिवर्तन’ के महान संतों में जाने-माने संतगुरु श्री रविदास जी को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित करने के साथ ही देश व दुनिया में रहने वाले उनके करोड़ों अनुयाइयों को इसकी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।संतगुरु श्री रविदास जी ’मन चंगा तो कठौती में गंगा’ अर्थात् मन को शुद्ध व पाक-साफ रखकर ही इंसान सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकता है तथा समाज व देश का भी भला कर सकता है, जैसा इंसानियत भरा संदेश देने के साथ-साथ अपना सारा जीवन इन्सानियत का संदेश देने में गुज़ारा और इस क्रम में ख़ासकर जाति भेद व द्वेष आदि के खि़लाफ आजीवन कड़ा संघर्ष करते रहकर अमर हो गए। उनका संदेश धर्म की पवित्रता को समाज सेवा व जनचेतना के लिए इंसान एवं इंसानियत की भलाई के लिए है, किसी स्वार्थ ख़ासकर संकीर्ण राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ की पूर्ति के लिए नहीं, जिसे भुला दिये जाने के कारण ही अमन-चैन, आपसी सौहार्द, भाईचारे तथा सुख-समृद्धि का वातावरण काफी कुछ प्रभावित है।संतगुरु श्री रविदास जी का उपदेश मानकर उनके करोड़ों ग़रीबों, शोषितों, पीडि़तों आदि का काफी कुछ भला हो सकता है, जिस पर समुचित ध्यान देने की ज़रूरत है।
वर्तमान मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने गुरु रविदास जी के जन्मदिन पर क्या कहा?
सद्गुरु रविदास जी महाराज की पावन जयंती के अवसर पर आज लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।इस अवसर पर उनकी नवनिर्मित भव्य प्रतिमा एवं सभागार का लोकार्पण भी किया।सद्गुरु रविदास जी महाराज ने अपनी कर्म-साधना से लोक-कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।उनकी पावन स्मृतियों को नमन।
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PANKAJ BABRA (Legal Name: PANKAJ KUMAR) is the Founder and Chief Editor of "RAJPATH Dastak" Foundation. He is an independent Digital News, Media Website and content writer focusing on social justice, constitutional values, public policy, and ground-level issues in India. Through "RAJPATH Dastak", he aims to amplify marginalized voices and present fact-based, people-centric content writing and journalism.