UGC Act क्यों ज़रूरी है? रोहित वेमुला और पायल तडवी की मौतें भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल?
भारत में शिक्षा को अक्सर “समानता का सबसे बड़ा हथियार” कहा जाता है। लेकिन जब यही शिक्षा व्यवस्था किसी छात्र की आत्मा, आत्मसम्मान और अंततः उसकी जान ले ले, तब सवाल सिर्फ व्यक्ति का नहीं रहता—सवाल पूरे सिस्टम पर खड़ा होता है। रोहित वेमुला और डॉ. पायल तडवी के नाम आज सिर्फ व्यक्तिगत त्रासदी नहीं हैं, बल्कि वे उस सामाजिक और शैक्षणिक अन्याय के प्रतीक बन चुके हैं, जिसे भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था आज भी पूरी तरह खत्म नहीं कर पाई है।
यहीं से एक बुनियादी सवाल जन्म लेता है—
UGC Act क्यों ज़रूरी है?
रोहित वेमुला के साथ हुई घटना?
2016 में हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया।
रोहित ने अपने आख़िरी पत्र में लिखा था:- मैं एक संख्या बनकर रह गया।
उसके साथ क्या हुआ? सामाजिक बहिष्कार, छात्रवृत्ति रोकी गई, हॉस्टल से निकाला गया और प्रशासनिक उत्पीड़न।
यह सब सिर्फ इसलिए क्योंकि वह दलित था, सवाल पूछता था और झुकने से इनकार करता था।
अगर UGC Act और उससे जुड़े नियमों को सख्ती से लागू किया गया होता, तो प्रशासन इतनी मनमानी नहीं कर पाता
सामाजिक न्याय समितियाँ सक्रिय होतीं
छात्र की आवाज़ दबाई नहीं जाती
रोहित की मौत यह बताती है कि क़ानून का कमजोर होना, जानलेवा हो सकता है।
डॉ. पायल तडवी: मैडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ हुई घटना?
2019 में मुंबई के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली डॉ. पायल तडवी—एक आदिवासी महिला डॉक्टर—ने आत्महत्या कर ली।
उसका “अपराध” क्या था? वह ST वर्ग से थी, उसने MBBS में जगह बनाई, उसने ऊँची जाति के वर्चस्व को चुनौती दी, उस पर:जातिसूचक शब्दों से हमला हुआ, और क्यों सार्वजनिक अपमान व मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी?
यह सब एक मेडिकल संस्थान में हुआ—जहाँ इंसानियत सिखाई जाती है।
अगर UGC Act की भावना और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइंस को सही ढंग से लागू किया गया होता, तो:
शिकायत तंत्र मज़बूत होता, आरोपी सुरक्षित महसूस नहीं करते और पायल आज ज़िंदा होती।
UGC Act क्यों जीवन रक्षक कानून है?
UGC Act सिर्फ प्रशासनिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह: सामाजिक न्याय का कवच?
यह सुनिश्चित करता है कि, SC/ST/OBC और Minority छात्रों को अवसर मिले आरक्षण सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित न रहे।
UGC Act में संविधान की भावना का विस्तार?
UGC Act वास्तव में: अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध), अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन) को कैंपस तक ले जाता है।
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RAJPATH Dastak
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PANKAJ BABRA (Legal Name: PANKAJ KUMAR) is the Founder and Chief Editor of "RAJPATH Dastak" Foundation. He is an independent Digital News, Media Website and content writer focusing on social justice, constitutional values, public policy, and ground-level issues in India. Through "RAJPATH Dastak", he aims to amplify marginalized voices and present fact-based, people-centric content writing and journalism.