UGC Act बना विरोधभाशो का अखाडा? अंबेडकरवाद और मनुवाद की जंग जारी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) कैंपस में हाल ही में UGC से जुड़े मुद्दों पर स्टूडेंट्स का शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट अचानक नेशनल बहस का मुद्दा बन गया। यह प्रोटेस्ट असल में हायर एजुकेशन में बराबरी, सोशल जस्टिस और तथाकथित “UGC इक्वालिटी एक्ट” के सपोर्ट में ऑर्गनाइज़ किया गया था। स्टूडेंट्स ने एजुकेशन में बराबरी पक्का करने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की बात कही। लेकिन, एक रुचि तिवारी नाम की एक YouTuber के दखल देने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और बात FIR तक पहुंच गई।
शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट क्यों बन गया जातिवाद का अखाडा?
स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक, प्रोटेस्ट पूरी तरह से शांतिपूर्ण था। स्टूडेंट्स कैंपस में आए और भाषणों के ज़रिए अपनी मांगें रख रहे थे। इसी बीच रूचि तिवारी नाम की YouTuber आईं और प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स से भड़काऊ सवाल करने लगीं। चश्मदीदों के मुताबिक, बातचीत का लहजा तीखा और उकसाने वाला था।
स्टूडेंट्स का आरोप है कि कुछ बार-बार दोहराए गए शब्दों और ताने वाले सवालों ने माहौल को और भड़का दिया। एक स्टूडेंट, अंजलि शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें गाली-गलौज का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि बातचीत भड़काने वाली थी और जर्नलिज़्म/पत्रकारिता के नाम पर वो लोगो को भड़काने का काम कर रही थी।
रूचि तिवारी नाम की youtuber ने नविन कुमार नंदन नाम के व्यक्ति को जो बामसेफ नाम से यूट्यूब चैनल चलता है उसका फोन छीनने के लिए पकड़ा और बिच बचाव में आई अंजलि शर्मा को भी धक्का देकर जमीं पर गिरा दिया।
“जर्नलिज़्म” या “उकसावा”?
पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांत हैं निष्पक्षता, दबाव की जांच और बैलेंस्ड प्रेजेंटेशन। अगर रिपोर्टिंग के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा या व्यवहार किसी ग्रुप का अपमान करता है या आंदोलन को भड़काता है, तो यह बहस का विषय बन जाता है। मीडिया एक्टिविस्ट का कहना है कि किसी भी सेंसिटिव मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय संयम और जिम्मेदारी ज़रूरी है। लेकिन यहाँ पर वो सब कुछ भुला दिया गया और “पांच साल से पानी नहीं मिला” “ए भया आपको भी पानी नहीं मिला क्या” “पानी पिओगे” जैसे वाकया बोलकर लोगो को भड़काने की कोसिस की गई।
FIR के दौरान पुलिस की मजूदगी में गली गलोच की गई।
सोशल मिडिया पर वीडियो में साफ साफ दिखाई दे रहा है की बामसेफ नाम से यूट्यूब चैनल चलने वाले नविन कुमार नंदन से रूचि तिवारी नाम की महिला फोन छींटे हुए नजर आ रही है और बिच बचाव में आई अंजलि शर्मा नाम की महिला को भी रूचि तिवारी उसका मुँह पकड़कर उसे जमीन पर गिरा देती है।
अंजलि शर्मा जब रूचि तिवारी नाम की महिला की FIR करने थाने में जाती है तो उनके पीछे abvp और अन्य जातिवादी लोग गुंडों की तरह उनको पुलिस की मजूदगी में गालियां देते है और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है। जो लड़की दिल्ली में अपने घर परिवार से दूर रहती हो और पुलिस की मजूदगी में उसको कुछ गुंडों के द्वारा धमकी दी जाती है और गली गलोच किया जाता है।
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RAJPATH Dastak
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PANKAJ BABRA (Legal Name: PANKAJ KUMAR) is the Founder and Chief Editor of "RAJPATH Dastak" Foundation. He is an independent Digital News, Media Website and content writer focusing on social justice, constitutional values, public policy, and ground-level issues in India. Through "RAJPATH Dastak", he aims to amplify marginalized voices and present fact-based, people-centric content writing and journalism.
यूजीसी Act Power centre me ho rahe jativad ke khilaf hai. Isiliye UGC Act jarur lagu kiya jana chahiye