UGC Act 2026 : उच्च शिक्षा में समानता के नए नियम क्या है। विवाद क्या है और क्यों मचा बवाल?
2026 में University Grants Commission (यूजीसी) ने भारत के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक नया UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 लागू किया है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत और अन्य किसी भी प्रकार के भेदभाव को खत्म करना और वास्तविक समानता व समावेशन (Equity & Inclusion) सुनिश्चित करना है।
UGC Act 2026 क्या है?
UGC Act 2026 अपने vki में एक कानून (Act) नहीं बल्कि एक ubZ नियमावली / Regulations को दर्शाता है जिसे UGC ने अपनी अधिसूचना के रूप में जारी किया है। इसे University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 कहा गया है, जो 2012 के पुराने नियमों का स्थान लेता है।
इस नए नियम
1:- उच्चशिक्षामेंसमानअवसर
2:- जाति, धर्म, लिंगयाविकलांगताकेआधारपरभेदभावकोरोकना
3:- सभीविश्वविद्यालयोंऔरकॉलेजोंमेंसमानअधिकारसुनिश्चितकरना
मुख्य बदलाव और प्रावधान
नए नियमों के तहत भेदभाव सिर्फ प्रत्यक्ष भेदभाव नहीं माना जाएगा, बल्कि अन्यायपूर्ण, या पक्षपातपूर्ण व्यवहार भी शामिल किया गया है। इसमें शामिल
1- जाति, धर्म
2- लिंग (जिसमें तृतीय लिंग भी शामिल)
3- जन्म स्थान
4- विकलांगता
5 अन्य सामाजिक और आर्थिक आधार
ये सभी आधार भेदभाव की श्रेणी में आते हैं।
- यह नियम विशेष रूप से उन समूहों को संरक्षित करने पर केंद्रित है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से पिछड़ा माना जाता रहा है, जैसे:
1 अनुसूचित जाति (SC)
2 अनुसूचित जनजाति (ST)
3 पिछड़ा वर्ग (OBC)
4 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)
5 विकलांग व्यक्ति (PwD)
समानता और समावेशन के लिए संस्थागत संरचना
हर उच्च शिक्षा संस्था (Universities, Colleges सहित) अब बाध्य है:
1- Equal Opportunity Centre (EOC) स्थापित करने के लिए
2- Equity Committee शुरू करने के लिए
ये दोनों संस्थाएँ भेदभाव की शिकायतों का रिकार्ड रखेंगे, समयबद्ध समाधान निकालेंगे और रिपोर्ट तैयार करेंगे।
Equity Committee में शामिल होंगे – SC, ST, OBC, विकलांग व्यक्ति और महिलाओं के प्रतिनिधि तथा संस्थान के अन्य प्रतिष्ठित सदस्य।
इससे संस्थानों के भीतर भेदभाव विरोधी निगरानी प्रणाली बनाई जाएगी और हर स्तर पर सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।
24×7 हेल्पलाइन और त्वरित शिकायत निवारण
इन नियमों के तहत हर संस्था को 24×7 Equity Helpline स्थापित करनी होगी, ताकि छात्र, शिक्षक और कर्मचारी किसी भी भेदभाव की रिपोर्ट तुरंत कर सकें।
इसके साथ ही, शिकायतों के समाधान के लिए समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
मानिटरिंग और रिपोर्टिंग व्यवस्था
UGC एक राष्ट्रीय स्तर की मॉनिटरिंग कमिटी बनाएगा, जो प्रत्येक संस्थान की रिपोर्टों की समीक्षा करेगी।
समय-समय पर रिपोर्टिंग व्यवस्था से भेदभाव पर निगरानी और नियमों का कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा।
UGC Act 2026 नियमों पर विवाद और आलोचना
जहाँ ये नियम समानता को बढ़ावा देने के लिए लागू किए गए हैं, वहीं इन्हें लेकर काफी विवाद भी उठे हैं। – कुछ विश्लेषण और आलोचना यह कहती हैं कि नई व्यवस्था में
– “सामान्य (General) समुदाय के लोगों को संभवतः जातीय भेदभाव का पीड़ित नहीं माना गया।”
– “गलत शिकायतों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं है।”
– “विशेष सुविधाएँ एक समूह को दी जा रही हैं।”
ऐसे आरोप सामने आए हैं कि इससे एकतरफा लाभ या भेदभाव के आरोपों का दुरुपयोग हो सकता है।
कारण और पृष्ठभूमि
नए UGC नियमों का कारण सिर्फ कानूनी अपडेट नहीं है, बल्कि इसके पीछे NEP 2020 (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) का फोकस भी शामिल है, जिसमें पूरी शिक्षा में समानता और समावेशन को प्राथमिकता दी जाती है।
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PANKAJ BABRA (Legal Name: PANKAJ KUMAR) is the Founder and Chief Editor of "RAJPATH Dastak" Foundation. He is an independent Digital News, Media Website and content writer focusing on social justice, constitutional values, public policy, and ground-level issues in India. Through "RAJPATH Dastak", he aims to amplify marginalized voices and present fact-based, people-centric content writing and journalism.